खुशियों की दास्तां

(खुशियों की दास्तां) 
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मुरैना / विकासखण्ड जौरा के ग्राम रूनीपुर के दिलीप शर्मा पुत्र मुरारी लाल शर्मा को प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजना ने आत्मनिर्भर बनाया। यह सब मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से साकार हुआ है।     
 ग्राम रूनीपुर के दिलीप शर्मा पुत्र मुरारी लाल शर्मा ने बताया कि कक्षा 10वीं जैसे तैसे उत्तीर्ण की क्योंकि पढ़ाई में मन नहीं लगता था। इसीलिये आगे पढ़ाई नहीं की। जबकि पिताजी बार-बार पढ़ाई के लिये प्रेसर ड़ालते रहते थे। परिवार में हम दो भाई है, बड़ा भाई ड्रायविंग का कार्य करते है। मैं कम पढ़ा-लिखा होने के कारण अच्छे खासा बिजनिस भी नहीं चला सकता। प्रतिदिन मन में ख्याल आते थे कि आखिर हम पढ़ भी नहीं पाये, तो जीवन यापन कैसे कर पायेंगे। यही बात दिमाग में गूंजती रहती थी। एक दिन पिताजी ने कहा कि जाओ अब तुम व्यस्क हो चुके हो, कुछ रोजगार देखो। परिवार में पैसे की आमदनी अधिक नहीं थी, इस कारण लघु उद्योग भी नहीं खोल सके। एक दिन दोस्त न कहा कि कटिंग टेलिरिंग एवं रेडीमेट के लिये मध्यप्रदेश खादी ग्रामोद्योग से 2 लाख रूपये तक ऋण कक्षा 10वीं पास तक के विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। यह बात मेरे मन भा गई और मैंने कक्षा 10वीं की मार्कशीट लगाकर 2 लाख रूपये का ऋण मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत रेडीमेट गारमेंट्स की दुकान के लिये ले लिया। मेरे द्वारा ग्राम रूनीपुर तो छोटा गांव में था, जौरा में रेडीमेट गारमेंट्स की दुकान खोली गई, जिससे आय का जरिया बना और धीरे-धीरे ऋण की किस्त भी चुकाता रहा। आज में एक अपने आप को रेडीमेट गारमेंट्स दुकान मालिक बन गया हूं। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी हो रही है। यह सब प्रदेश की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से साकार हुआ है।